26 मई 2026, सरायकेला : कुकड़ू प्रखंड के सिरुम शहीद चौक क्षेत्र में सरकारी विकास योजनाओं को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। एक ओर जहां भवन निर्माण विभाग के तहत एक मॉडल हेल्थ सब सेंटर का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है, वहीं मात्र 300 मीटर की दूरी पर एक और नए स्वास्थ्य केंद्र का शिलान्यास आज मंगलवार को किया जा रहा है। इस पूरे मामले ने स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक निर्णय और योजनाओं के समन्वय पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय जानकारी के अनुसार पहले से बन रहा मॉडल हेल्थ सब सेंटर लगभग 80 प्रतिशत पूरा हो चुका है। इसकी अनुमानित लागत करीब ₹55,50,000 बताई जा रही है। यह भवन निर्माण विभाग (भवन प्रमंडल) द्वारा तैयार किया जा रहा है। ग्रामीणों के अनुसार यह केंद्र क्षेत्र के लिए काफी उपयोगी साबित होगा, क्योंकि इससे प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की सुविधा बढ़ेगी।

लेकिन इसी बीच सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब एक स्वास्थ्य केंद्र लगभग तैयार है, तो मात्र 300 मीटर की दूरी पर ही दूसरा स्वास्थ्य केंद्र क्यों बनाया जा रहा है? यह दूसरा केंद्र जिला परिषद की 15वीं वित्त आयोग की राशि से स्वीकृत बताया जा रहा है, जिसकी लागत लगभग ₹1,39,70,506 है। इस निर्णय को लेकर स्थानीय लोगों में आश्चर्य और नाराजगी दोनों देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि इतनी कम दूरी पर दो अलग-अलग स्वास्थ्य केंद्रों की आवश्यकता समझ से परे है। इससे न केवल सरकारी धन का दोहराव होगा, बल्कि अन्य जरूरतमंद क्षेत्रों में विकास कार्य प्रभावित हो सकते हैं।

किस अधिकारी नें दी दूसरे योजना की मंजूरी?
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि यदि एक ही क्षेत्र में दो स्वास्थ्य केंद्र बनाए जाते हैं, तो यह योजना की प्राथमिकता और सर्वे प्रक्रिया पर सवाल खड़ा करता है। क्या पहले से चल रहे निर्माण की जानकारी संबंधित विभागों के पास नहीं थी, या फिर जानबूझकर योजनाओं को दोहराया गया? सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इस तरह की योजना को मंजूरी किस स्तर पर दी गई और इसके पीछे तकनीकी या प्रशासनिक आधार क्या था।

भूमि चयन पर हो सकता हैं विवाद, कहीं विस्थापित भूमि तो नहीं?
आज जिस स्थान पर दूसरे स्वास्थ्य केंद्र का शिलान्यास किया जाना है, वहां भूमि चयन को लेकर भी कुछ लोगों ने आपत्ति जताई है। स्थानीय स्तर पर यह आशंका भी जताई जा रही है कि कहीं यह जमीन विवादित या विस्थापितों से जुड़ी तो नहीं है, हालांकि इस पर आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। वैसे 15वीं वित्त आयोग की राशि का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करना होता है, लेकिन जब योजनाओं में इस तरह का दोहराव सामने आता है, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या संसाधनों का सही उपयोग हो रहा है या नहीं। इस पूरे मामले ने अब जिला प्रशासन की भूमिका को भी चर्चा में ला दिया है। लोग मांग कर रहे हैं कि इस मामले की जांच होनी चाहिए और यह स्पष्ट किया जाए कि 300 मीटर की दूरी पर दो स्वास्थ्य केंद्रों की आवश्यकता क्यों पड़ी। यदि यह योजना आवश्यकता आधारित नहीं है, तो यह सीधे तौर पर सरकारी राशि के दुरुपयोग का मामला बन सकता है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले पर क्या संज्ञान लेता है और क्या कोई स्पष्ट जवाब सामने आता है या नहीं। फिलहाल यह पूरा मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग इसे विकास बनाम योजना ठेकेदारी प्रथा के रूप में देख रहे हैं।









