सरायकेला: कुकड़ू अंचल स्थित सिरूम पुनर्वास स्थल में विस्थापित भूमि पर अवैध कब्जा और निजी निर्माण का मामला अब गंभीर रूप लेता जा रहा है। पीजी पोर्टल में शिकायत के जांच में पुनर्वास पदाधिकारी, सुवर्णरेखा परियोजना, चांडिल द्वारा कई गंभीर तथ्यों की पुष्टि की गई है। इसके बावजूद अब तक प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से सवाल खड़े हो रहे हैं। जांच प्रतिवेदन में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि सिरूम पुनर्वास स्थल में अवैध निजी मकान एवं कार्यालय का निर्माण किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार संबंधित व्यक्तियों द्वारा पुनर्वास स्थल की सरकारी भूमि पर कब्जा कर निजी उपयोग के लिए भवन बनाया गया है।
जांच रिपोर्ट में अवैध कब्जा का खुलासा, फिर भी प्रशासन मौन
रिपोर्ट में यह भी दर्ज है कि सुबोध गोपाल महतो द्वारा पुनर्वास स्थल पर ही अवैध रूप से सीमेंट गोदाम का निर्माण किया गया है। विभागीय प्रतिवेदन में यह उल्लेख है कि यह निर्माण पुनर्वास नीति के दायरे से बाहर और अवैध है। प्रतिवेदन के तीसरे बिंदु में कहा गया है कि सुबोध गोपाल महतो, पिता राज किशोर महतो, के नाम से विकास पुस्तिका संख्या-17177 निर्गत है तथा वे सभी देय पुनर्वास अनुदान प्राप्त कर चुके हैं। इसके बावजूद पुनर्वास स्थल की अतिरिक्त भूमि पर कब्जा बनाए रखा गया है।
रिपोर्ट में परियोजना नीति का हवाला देते हुए कहा गया है कि पुनर्वास नीति के अनुसार 12.5 डिसमिल से अधिक भूमि का अधिकार नहीं बनता। लेकिन जिस भूमि पर कब्जा किया गया है, वह विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार अवैध है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि लगभग 3 एकड़ भूमि पर कब्जा किया गया है।
विभागीय रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि सिरूम पुनर्वास स्थल हेतु कुल 127.67 एकड़ भूमि अधिग्रहित की गई थी। वहीं अब तक कुल 18 विस्थापितों को पर्चा निर्गत किया गया है। रिपोर्ट के अंतिम बिंदु में यह भी उल्लेख है कि प्रशासन द्वारा अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

फिर एक बार शिकायत से मामला हुआ गर्म, कार्रवाई का इंतजार
यही बात अब पूरे मामले को और गंभीर बना रही है। शिकायतकर्ता का कहना है कि जब विभागीय जांच में अवैध कब्जा, निजी कार्यालय, मकान और सीमेंट गोदाम निर्माण की पुष्टि हो चुकी है, तब भी प्रशासन मौन क्यों है। मामले को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। आखिर किसके संरक्षण में सिरुम पुनर्वास स्थल की सरकारी भूमि पर निजी कार्यालय और मकान बनाए गए? पुनर्वास लाभ और मुआवजा प्राप्त करने के बाद भी अतिरिक्त भूमि पर कब्जा कैसे जारी है? और आखिर सुवर्णरेखा परियोजना कार्यालय तथा स्थानीय प्रशासन कार्रवाई से बच क्यों रहा है?
इधर पीजी पोर्टल में दोबारा की गई शिकायत में मांग की गई है कि सिरूम पुनर्वास स्थल की सरकारी भूमि को तत्काल कब्जामुक्त कराया जाए, अवैध निर्माण हटाया जाए, कला-संस्कृति भवन को सार्वजनिक उपयोग हेतु बहाल किया जाए तथा दोषियों के खिलाफ भूमि अतिक्रमण एवं सरकारी संपत्ति के दुरुपयोग के तहत कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही शिकायतकर्ता ने संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और जांच प्रतिवेदन सार्वजनिक करने की भी मांग की है।









