सरायकेला, (गुलाम रब्बानी): सरायकेला-खरसावां जिला ने बीते लगभग दो वर्षों (04 जून 2024 से 17 अप्रैल 2026) में एक ऐसे पुलिस नेतृत्व को देखा, जिसने न केवल विधि-व्यवस्था को मजबूत बनाए रखा, बल्कि प्रशासनिक संतुलन, त्वरित निर्णय क्षमता और संवेदनशीलता का भी उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया। आईपीएस मुकेश कुमार लूणायत का सरायकेला खरसावां जिला में पुलिस अधीक्षक के रूप में कार्यकाल कई मायनों में जिले के लिए उल्लेखनीय और यादगार रहा। उनके नेतृत्व में जिले के खरसावां, सरायकेला और ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्रों में चुनाव शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुए। यह उपलब्धि केवल प्रशासनिक दक्षता का परिणाम नहीं, बल्कि सूक्ष्म योजना, समन्वय और जमीनी स्तर पर मजबूत पुलिसिंग का प्रमाण है। इसी तरह 2026 के निकाय चुनाव सरायकेला नगर पंचायत, कपाली नगर परिषद और आदित्यपुर क्षेत्र में भी बिना किसी अप्रिय घटना के सफलतापूर्वक आयोजित किए गए।
बेहतर पुलिसिंग से जिले में नहीं हुआ कोई बड़ी घटना
जिले में त्योहारों के दौरान शांति बनाए रखना किसी भी जिले के लिए बड़ी चुनौती होती है, लेकिन दुर्गा पूजा, होली, रामनवमी, ईद और बकरीद जैसे संवेदनशील मौकों पर भी जिले में सौहार्दपूर्ण वातावरण कायम रहा। खासकर हर वर्ष 1 जनवरी को आयोजित खरसावां गोलीकांड के स्मृति कार्यक्रम को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराना प्रशासनिक परिपक्वता को दर्शाता है। अपराध नियंत्रण के क्षेत्र में भी उनका कार्यकाल प्रभावशाली रहा। जिले में कोई बड़ा गैंगवार नहीं हुआ और अपराधियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की गई। अपराध करने वालों को शीघ्र ही गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेजा गया, जिससे आम जनता में सुरक्षा का विश्वास मजबूत हुआ। सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि इस पूरे कार्यकाल में जिले में कोई नक्सली घटना सामने नहीं आई।
ऑपरेशन प्रहरी पहल से अड्डेबाजी, नशाखोरी और छेड़खानी हुआ कम
इनके द्वारा शुरु किए गए ‘ऑपरेशन प्रहरी पहल’ जैसी पहल ने सामाजिक स्तर पर सकारात्मक असर डाला। अड्डेबाजी, नशाखोरी और छेड़खानी जैसी समस्याओं पर प्रभावी अंकुश लगा, जिससे युवाओं और आम नागरिकों में सुरक्षित माहौल का अनुभव हुआ। हालांकि नीमडीह थाना क्षेत्र के झिमड़ी गांव में एक संवेदनशील घटना के दौरान तनाव की स्थिति उत्पन्न हुई, लेकिन इनके त्वरित और संतुलित कार्रवाई के जरिए स्थिति को जल्द नियंत्रित कर लिया गया। लगभग 45 दिनों तक पुलिस और मजिस्ट्रेट की तैनाती कर प्रशासन ने शांति बहाल की जो संकट प्रबंधन का उत्कृष्ट उदाहरण है। इसी प्रकार ईचागढ़ थाना क्षेत्र के डुमटांड में बालू विवाद से जुड़ी घटना में भी जवाबदेही तय करते हुए संबंधित पुलिस पदाधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की गई।
अफीम की खेती पर निर्णायक प्रहार, खेती की बदली तस्वीर
सरायकेला-खरसावां जिले के ख़ासकर कुचाई, खरसावां और ईचागढ़ थाना क्षेत्रों में लंबे समय से अफीम की अवैध खेती एक गंभीर चुनौती बनी हुई थी। यह न केवल कानून-व्यवस्था के लिए खतरा थी, बल्कि स्थानीय युवाओं और किसानों को गलत दिशा में भी ले जा रही थी। लेकिन इनके कार्यकाल में पुलिस प्रशासन की सख्ती और सतत अभियान के परिणामस्वरूप इस अवैध गतिविधि पर लगभग पूर्ण विराम लग गया। लगातार छापेमारी, जागरूकता अभियान और कड़ी निगरानी के कारण अफीम की खेती करने वालों में भय का माहौल बना, वहीं वैकल्पिक आजीविका के लिए प्रशासन द्वारा प्रेरित भी किया गया। इसका सकारात्मक परिणाम यह हुआ कि अब इन इलाकों के किसान अफीम जैसी अवैध खेती छोड़कर सब्जी और धान जैसी वैध फसलों की ओर लौट रहे हैं। खेती के इस बदलाव ने न केवल कानून व्यवस्था को मजबूत किया है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा दी है। यह पहल दर्शाती है कि सही नीति, सख्त कार्रवाई और जनसहभागिता से किसी भी जटिल समस्या का स्थायी समाधान संभव है।
अनावश्यक ट्रांसफर- पोस्टिंग से किया परहेज
उनके कार्यकाल की एक और विशेषता रही अनावश्यक तबादलों से परहेज। इससे विभागीय स्थिरता बनी रही और पुलिसिंग में निरंतरता देखने को मिली। एक आईपीएस अधिकारी के रूप में उन्होंने निर्णय लेने की क्षमता और नेतृत्व कौशल का प्रभावी प्रदर्शन किया। अब जब उनकी पोस्टिंग रामगढ़ जिले में पुलिस अधीक्षक के रूप में हो गई है, तो सरायकेला-खरसावां जिला निश्चित रूप से उनके कार्यों को याद करेगा। उनका कार्यकाल इस बात का उदाहरण है कि सख्ती और संवेदनशीलता का संतुलन बनाकर किस तरह एक जिले में शांति, सुरक्षा और विश्वास कायम किया जा सकता है। आईपीएस मुकेश कुमार लूणायत ने अपने कार्यों से यह साबित किया है कि प्रभावी नेतृत्व ही सुशासन की कुंजी है और यही कारण है कि उन्हें सरायकेला खरसावां जिला एक अच्छे अधिकारी के रूप में हमेशा याद रखेगा।









