सरायकेला : संविधान निर्माता, भारत रत्न डॉ. भीमराव आम्बेडकर की 135वीं जयंती कुकड़ू प्रखंड क्षेत्र के मध्य विद्यालय पांड्रा में धूमधाम से मनाई गई। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलित कर किया गया, जिसके बाद केक काटकर जयंती मनाई गई। इस अवसर पर शिक्षकों एवं अतिथियों ने बाबा साहब के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। विद्यालय के विद्यार्थियों ने गीत, भाषण एवं नृत्य के माध्यम से रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए, जिसमें उनके जीवन, संघर्ष और सामाजिक योगदान को दर्शाया गया।

समानता और अधिकारों के प्रहरी थे आंबेडकर : रबिन्द्रनाथ
कार्यक्रम में शिक्षक रबिन्द्र नाथ मछुआ ने अपने संबोधन में कहा कि बाबा साहब डॉ. भीमराव आम्बेडकर केवल संविधान निर्माता ही नहीं, बल्कि समानता, शिक्षा और अधिकारों के सबसे बड़े प्रतीक थे। उन्होंने विद्यार्थियों से उनके आदर्शों को अपनाने और शिक्षा के माध्यम से समाज में बदलाव लाने की अपील की। अन्य शिक्षकों ने भी अनुशासन और शिक्षा के महत्व पर बल दिया।

कार्यक्रम में शिक्षक, जनप्रतिनिधि और ग्रामीण रहें मौजूद
कार्यक्रम में प्रधानाध्यापक गजाधर बैठा, असरण अली अंसारी, दिवाकर महतो, लखिनारायण महतो, दिकू राम मुर्मू, विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष मृत्युंजय गोप, निरंजन महतो, गुणाधर महतो, बनारसी रजक, रोहिण रजक, संयोजिका बारी गोप, कृतु मुर्मू, परेश चंद्र महतो, बीरेंद्रनाथ महतो, नरोत्तम गोप सहित पांड्रा के अनेक ग्रामीण उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन केक काटकर किया गया तथा अंत में सभी अतिथियों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।









