सरायकेला : कुकड़ू प्रखंड स्थित झारखंड बालिका आवासीय विद्यालय में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए कक्षा 6 में नामांकन को लेकर इन दिनों क्षेत्र में चर्चाएं तेज हो गई हैं। आवेदन पत्र वितरण एवं जमा करने की अंतिम तिथि 10 फरवरी 2026 तक निर्धारित थी। अब जब चयन प्रक्रिया अंतिम चरण में बताई जा रही है, तब पारदर्शिता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। विद्यालय में कक्षा 6 में नामांकन के लिए कुल 50 सीटें निर्धारित हैं, जबकि आवेदनों की संख्या इससे कहीं अधिक बताई जा रही है। ऐसे में स्वाभाविक रूप से प्रतिस्पर्धा बढ़ी है और अभिभावकों की नजर चयन प्रक्रिया पर टिकी हुई है।
इस बीच सूत्रों के हवाले से यह जानकारी सामने आ रही है कि इन 50 सीटों के लिए करीब 40 अनुशंसा पत्र विभिन्न जनप्रतिनिधियों द्वारा भेजे गए हैं। हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन क्षेत्र में इसको लेकर चर्चा तेज है। विद्यालय में नामांकन के लिए सरकार द्वारा स्पष्ट मानदंड तय किए गए हैं। इसके तहत गरीबी रेखा से नीचे (BPL) परिवारों की बच्चियां, अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) तथा अल्पसंख्यक समुदाय की छात्राओं को प्राथमिकता दी जाती है। इसके अलावा अनाथ एवं एकल अभिभावक की संतानों को भी वरीयता देने का प्रावधान है। ऐसे में यह अपेक्षा की जाती है कि चयन पूरी तरह इन मानकों के आधार पर ही किया जाए।
लेकिन अनुशंसा पत्रों की बढ़ती संख्या को लेकर यह सवाल उठ रहा है कि क्या चयन प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी रह पाएगी? यदि सिफारिशों का प्रभाव हावी होता है, तो तय मानदंडों की अनदेखी होने की आशंका जताई जा रही है। इससे उन छात्राओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं, जो वास्तव में इन मानकों के तहत पात्र हैं। नाम न बताने के शर्त पर स्थानीय अभिभावकों और ग्रामीणों का कहना है कि आवासीय विद्यालयों का उद्देश्य समाज के कमजोर और वंचित वर्ग की मेधावी छात्राओं को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराना है। यदि चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं रहेगी, तो इस उद्देश्य पर भी प्रश्नचिह्न लग सकता है। कई अभिभावकों ने यह भी कहा कि वे अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित हैं और चाहते हैं कि चयन पूरी तरह निष्पक्ष तरीके से हो।
सूत्रों के अनुसार, नामांकन के लिए एक प्रारंभिक सूची तैयार कर जिला स्तर पर भेज दी गई है। अब जिला प्रशासन से अनुमोदन मिलने के बाद ही अंतिम सूची जारी की जाएगी। ऐसे में सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि जिला स्तर पर किस प्रकार से निर्णय लिया जाता है और क्या चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाती है। यह पूरा मामला अब एक अहम सवाल खड़ा करता है कि क्या कुकड़ू बालिका आवासीय विद्यालय में नामांकन तय नियमों और पात्रता के आधार पर होगा, या फिर अनुशंसा पत्रों का प्रभाव देखने को मिलेगा? फिलहाल, क्षेत्र में इस मुद्दे को लेकर चर्चा जारी है। अभिभावक, छात्राएं और स्थानीय लोग सभी अंतिम सूची का इंतजार कर रहे हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन किस तरह इस पूरी प्रक्रिया को निष्पक्ष, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाते हुए अंतिम सूची जारी करता है।









