सरायकेला: देश आजादी के 79वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है। सरकार अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने का दावा करती है। लेकिन सरायकेला-खरसावां जिले के कुकड़ू प्रखंड के कुकड़ू की रहने वाली 93 वर्षीय बुजुर्ग मेनका कुमार की कहानी इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है। वर्ष 1933 में जन्मीं मेनका कुमार ने आजादी से पहले का भारत देखा, आजाद भारत का निर्माण देखा और कई सरकारों का दौर भी देखा, लेकिन जीवन के इस अंतिम पड़ाव में वे पेंशन और राशन जैसी बुनियादी सरकारी सुविधाओं से वंचित हैं।

मार्च 2024 से NPCI-DBT लिंक नहीं होने का दावा, पेंशन व राशन बंद
आधार कार्ड के अनुसार मेनका कुमार, स्वर्गीय कृष्ट कुमार की पत्नी हैं। उनका निवास ग्राम-कुकडू, पंचायत-कुकडू, पोस्ट-कुकडू, थाना-तिरुलडीह, जिला-सरायकेला-खरसावां में है। परिजनों का कहना है कि मार्च 2024 से आधार में NPCI-DBT लिंक नहीं होने के कारण उनकी सामाजिक सुरक्षा पेंशन बंद हो गई है। साथ ही राशन का लाभ मिलने में भी परेशानी आ रही है। परिवार का आरोप है कि पिछले करीब ढाई वर्ष से बैंक और संबंधित कार्यालयों के चक्कर लगाने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो पाया है।

ग्राम प्रधान से बीडीओ और बैंक तक जिम्मेदारी पर सवाल, क्या मिलेगा बकाया लाभ?
परिजनों का कहना है कि गांव में ग्राम प्रधान, वार्ड सदस्य, मुखिया, पंचायत सचिव, प्रज्ञा केंद्र, बैंक और प्रखंड प्रशासन जैसी पूरी सरकारी व्यवस्था मौजूद है। इसके बावजूद एक 93 वर्षीय बुजुर्ग महिला का NPCI-DBT अपडेट नहीं हो सका। सवाल यह है कि जब सरकार घर-घर योजनाओं का लाभ पहुंचाने की बात करती है, तब इतनी उम्र की महिला को तकनीकी प्रक्रिया पूरी कराने के लिए भटकना क्यों पड़ रहा है? यह मामला कई गंभीर सवाल भी खड़े करता है। यदि अब मेनका कुमार का NPCI-DBT लिंक करा दिया जाता है, तो क्या उन्हें मार्च 2024 से अब तक की रुकी हुई सामाजिक सुरक्षा पेंशन का बकाया मिलेगा? यदि राशन भी तकनीकी कारणों से नहीं मिल पाया है, तो क्या उसका भी लाभ उन्हें मिलेगा? इन सवालों का जवाब संबंधित विभाग और प्रशासन के पास ही है।
93 वर्ष की आयु में सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाना किसी भी बुजुर्ग के लिए आसान नहीं है। ऐसे में यह मामला केवल एक महिला की परेशानी नहीं, बल्कि सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और स्थानीय प्रशासन की संवेदनशीलता की भी परीक्षा है। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग इस मामले में कितनी गंभीरता दिखाते हैं और मेनका कुमार को उनका अधिकार कब तक दिला पाते हैं।









