सरायकेला: राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी सुब्रतो मुखर्जी फुटबॉल प्रतियोगिता का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों से प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को आगे लाना है। लेकिन कुकड़ू प्रखंड में आयोजित एक दिवसीय प्रतियोगिता अब कई सवालों के घेरे में आ गई है। खिलाड़ियों को भोजन में सिर्फ खिचड़ी दिए जाने से लेकर मेडिकल टीम की अनुपस्थिति, प्रशासनिक अधिकारियों को सूचना नहीं देने और आयोजन में देरी तक कई ऐसे मुद्दे सामने आए हैं, जिन पर जवाब मांगे जा रहे हैं।

जिला ने 10 जून को जारी कर दिया था आदेश, फिर 25 जून तक प्रखंड क्यों रहा मौन?
उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार जिला शिक्षा अधीक्षक-सह-जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (समग्र शिक्षा) ने 10 जून 2026 को ही सभी प्रखंडों को प्रतियोगिता आयोजित कराने का निर्देश जारी कर दिया था। इसके बावजूद कुकड़ू प्रखंड से विद्यालयों को सूचना 25 जून को जारी की गई, जबकि प्रतियोगिता 27 जून को आयोजित कर दी गई। ऐसे में विद्यालयों को खिलाड़ियों के चयन, अभ्यास, दस्तावेज तैयार करने और टीम भेजने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल सका। इतनी कम अवधि में सभी विद्यालयों की भागीदारी सुनिश्चित करना संभव नहीं था। अब सवाल यह है कि जिला से समय पर निर्देश मिलने के बावजूद प्रखंड स्तर पर 15 दिनों तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई।


सिर्फ दो दिन में कैसे हुई तैयारी? क्या सिर्फ कोरम पूरा करना था?
जिला स्तर से 10 जून को ही प्रतियोगिता आयोजित करने का निर्देश जारी हो चुका था, लेकिन कुकड़ू प्रखंड से विद्यालयों को सूचना 25 जून को भेजी गई। इसके बाद 27 जून को प्रतियोगिता आयोजित कर दी गई। यानी खिलाड़ियों के चयन, अभ्यास, टीम गठन और अन्य तैयारियों के लिए विद्यालयों को सिर्फ दो दिन का समय मिला। शिक्षकों का कहना है कि इतनी कम अवधि में सभी विद्यालयों की भागीदारी सुनिश्चित करना संभव नहीं था। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या अंतिम समय में सिर्फ विभागीय कोरम पूरा करने के लिए प्रतियोगिता आयोजित की गई?
प्रखंड समिति में BDO संरक्षक, फिर उन्हें सूचना क्यों नहीं?
सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों में प्रखंड स्तरीय समिति का स्पष्ट गठन किया गया है। इस समिति में प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO)- संरक्षक, प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी (BEEO)- अध्यक्ष, प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी (BPO)-समन्वयक, बनाए गए हैं। लेकिन कुकड़ू प्रखंड की बीडीओ राजश्री ललिता बाखला और प्रभारी सीओ अभय कुमार द्विवेदी को प्रतियोगिता की सूचना ही नहीं दी गई। यदि यह सही है, तो सवाल उठता है कि जब BDO स्वयं समिति के संरक्षक हैं, तब उन्हें आयोजन से अलग क्यों रखा गया? क्या समिति की बैठक हुई थी? यदि हुई तो उसके कार्यवृत्त कहाँ हैं?
खिलाड़ियों को मिला सिर्फ खिचड़ी का भोजन
प्रतियोगिता के दौरान सबसे अधिक चर्चा भोजन व्यवस्था को लेकर रही। पूरे दिन खेल रहे छात्र-छात्राओं को भोजन के नाम पर केवल खिचड़ी परोसी गई। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या राज्य स्तरीय खेल प्रतियोगिता में खिलाड़ियों के लिए यही व्यवस्था पर्याप्त थी? खिलाड़ियों के पोषण और ऊर्जा की जरूरतों को देखते हुए क्या भोजन की गुणवत्ता पर ध्यान दिया गया?
मेडिकल टीम तक नहीं थी मौजूद
प्रतियोगिता के दौरान किसी भी प्रकार की मेडिकल टीम की व्यवस्था नहीं थी, हालांकि पत्र में CHC ईचागढ़ को पत्र की प्रतिलिपि दी गई थी। खेल प्रतियोगिताओं में चोट लगने की संभावना हमेशा बनी रहती है। ऐसे में प्राथमिक उपचार की व्यवस्था अनिवार्य मानी जाती है। यदि मेडिकल टीम नहीं थी, तो किसी अप्रिय घटना की स्थिति में जिम्मेदारी किसकी होती?
गिने-चुने विद्यालयों को ही मिला मौका?
इस प्रतियोगिता में कुकड़ू प्रखंड के सभी विद्यालयों को समय पर सूचना नहीं मिली। कई विद्यालयों को प्रतियोगिता की जानकारी तब मिली जब तैयारी का समय लगभग समाप्त हो चुका था। इस कारण कई छात्र-छात्राओं को प्रतियोगिता में भाग लेने का अवसर नहीं मिल पाया। इधर 25 जून 2026 को जारी पत्र पर BPO के हस्ताक्षर थे, जबकि BEEO के हस्ताक्षर नहीं थे। इसको लेकर भी शिक्षा विभाग के अंदर चर्चा का विषय बना हुआ है।
अब उठ रहे हैं ये बड़े सवाल, कौन देगा जवाब?
इस प्रतियोगिता से संबंधित पत्र यानी जिला का आदेश 10 जून 2026 को जारी था, फिर BEEO कार्यालय से सूचना 25 जून 2026 को क्यों जारी हुआ? जिला के आदेश और प्रखंड के पत्र के बीच 15 दिनों का अंतर कई सवाल खड़े कर रहा है। यदि जिला कार्यालय समय पर निर्देश दे चुका था, तो प्रखंड शिक्षा कार्यालय ने इतने दिनों तक विद्यालयों को सूचना क्यों नहीं दी? क्या इस देरी के कारण कई विद्यालय प्रतियोगिता की तैयारी से वंचित रह गए?

हालांकि प्रतियोगिता में विजेता टीमों को मेडल और शील्ड देकर सम्मानित किया गया, लेकिन पूरे आयोजन पर उठ रहे सवाल अब चर्चा का विषय बन गए हैं। स्थानीय लोगों कहना है कि यदि खेल प्रतियोगिताएं सिर्फ औपचारिकता निभाने के लिए होंगी, तो ग्रामीण क्षेत्र के खिलाड़ियों को इसका वास्तविक लाभ कैसे मिलेगा? सरकारी नियमों के अनुसार समिति के सभी प्रमुख सदस्यों की सहभागिता सुनिश्चित होनी चाहिए थी। ऐसे में यदि संरक्षक ही कार्यक्रम से अनभिज्ञ रहे, तो आयोजन की पारदर्शिता और प्रक्रिया पर स्वाभाविक रूप से प्रश्न खड़े होते हैं।









