दृढ़-इच्छाशक्ति के धनी थे बिनोद बाबू

दृढ़-इच्छाशक्ति के धनी थे बिनोद बाबू

इन्हे भी जरूर देखे

14 जून कुकड़ू नक्सली घटना विशेष: कुकड़ू की वह खौफनाक शाम, सात साल बाद भी नहीं मिटे शहादत के निशान

गुलाम रब्बानी, सरायकेला। झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले का कुकड़ू प्रखंड। शांत ग्रामीण परिवेश के बीच बसा यह इलाका कभी अपनी स्वच्छ हवा, प्राकृतिक सुंदरता...

कुकड़ू: प्रतिभा सम्मान समारोह आयोजित, मेधावी छात्र-छात्राओं को किया गया सम्मानित, बच्चों पर अनावश्यक दबाव न डालें: सविता महतो

सरायकेला : कुकड़ू स्थित मुंडा भवन में मंगलवार को वीर बिरसा महाविद्यालय डाटम प्रबंधन समिति के तत्वावधान में भव्य प्रतिभा सम्मान समारोह का आयोजन...

सिल्ली(तारकेश्वर महतो)। झारखंड आंदोलन के महानायक बिनोद बिहारी महतो की पुण्यतिथि के अवसर पर गूंज महोत्सव का आयोजन किया जाता है। कौन थे बिनोद बिहारी महतो- मूलत धनबाद जिले के बलियापुर प्रखंड के बड़ादाहा गांव के माहिंदी महतो व मंदाकिनी माहताइन के एकलौते पुत्र जिनका जन्म 23सितंबर 1921 को हुआ था। बचपन से ही दृढ़-इच्छाशक्ति के धनी रहे बिनोद बाबु गांव से जंगल के रास्ते नित्य 15 किलोमीटर पैदल चलते हुए अपने इलाके के पहले मैट्रिक पास करने वाले छात्र थे।ये रास्ता चलते हुए सोहराई गीतों के सुर मे पाठ जोर जोर से याद किया करते थे जिसे सुनकर राहगीर भौंचक हो उन्हे ताकते रह जाते। इनकी मां घर मे उगाई सब्जियां बेच कर इनकी पढ़ाई का खर्च वहन करती थी। आगे चलकर उन्होने वकालत पूरी की और धनबाद के उसी कोर्ट मे पहुंचे जहां एक समय किरानी रहते वे एक वकील से तिरस्कृत हुए थे। एक वकील के तौर पर उन्होने अपने क्षेत्र के जनजीवन की कठिनाईयों त्रासदियों व सामंतवादी अत्याचारों को तीव्रता से महसूस किया व इन्हे इनसे मुक्त होने की दिशा मे अपना जीवन अर्पित करने की ठान ली। विशेषकर बोकारो स्टील प्लांट की स्थापना के दौरान विस्थापितों पर हुए अत्याचारों से वे इतने मर्माहत हुए कि इनकी हक की लड़ाई लड़ना ही अपने जीवन का परम उद्देश्य बना लिया। ऐसे महत्वपुर्ण कालक्रम मे उनसे ए के राय और शिबु सोरेन जुड़ गये। यह 1966- 67 का वर्ष था जिसने झारखंड आंदोलन की दिशा- दशा ही तय कर दी थी। झारखंड के लिए अतिशय दूर्भाग्य रहा कि अलग राज्य आंदोलन को मंझधार मे छोड़ अचानक उन्होने अलविदा ले ली। 18 दिसंबर1991 को दिल्ली संसद भवन मे अचानक उनकी तबियत बिगड़ जाने और थोड़ी ही देर पश्चात हुए उनके निधन से पुरा झारखंड रो पड़ा। परंतु उनका सपना अंततः पुरा हुआ और दशकों से चले आंदोलन ने झारखंडवासियों को 15 नवंबर 2000 मे नये राज्य की सौगात दी।

विज्ञापन बॉक्स (विज्ञापन देने के लिए संपर्क करें)

इन्हे भी जरूर देखे

14 जून कुकड़ू नक्सली घटना विशेष: कुकड़ू की वह खौफनाक शाम, सात साल बाद भी नहीं मिटे शहादत के निशान

गुलाम रब्बानी, सरायकेला। झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले का कुकड़ू प्रखंड। शांत ग्रामीण परिवेश के बीच बसा यह इलाका कभी अपनी स्वच्छ हवा, प्राकृतिक सुंदरता...

कुकड़ू: प्रतिभा सम्मान समारोह आयोजित, मेधावी छात्र-छात्राओं को किया गया सम्मानित, बच्चों पर अनावश्यक दबाव न डालें: सविता महतो

सरायकेला : कुकड़ू स्थित मुंडा भवन में मंगलवार को वीर बिरसा महाविद्यालय डाटम प्रबंधन समिति के तत्वावधान में भव्य प्रतिभा सम्मान समारोह का आयोजन...

राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस की ‘गुगली’, जेएमएम की बढ़ी सियासी चुनौती, जेएमएम से पहले कांग्रेस ने प्रणव झा को बनाया उम्मीदवार

रांची: झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए होने वाले चुनाव से पहले कांग्रेस ने उम्मीदवार घोषित कर सियासी हलकों में नई चर्चा...

Must Read