रांची, प्रतिनिधि। प्रतिबंधित सीपीआई-माओवादी संगठन के वरिष्ठ पोलित ब्यूरो सदस्य प्रशांत बोस उर्फ ‘किशन दा’ का शुक्रवार को निधन हो गया। 82 वर्षीय बोस को तबीयत बिगड़ने के बाद रांची के रिम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। अधिकारियों के अनुसार, वे बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा में बंद थे। शुक्रवार तड़के उन्हें सांस लेने में गंभीर परेशानी हुई, जिसके बाद सुबह करीब 6 बजे कड़ी सुरक्षा के बीच रिम्स लाया गया। डॉक्टरों की टीम ने उनका इलाज शुरू किया, लेकिन हालत में सुधार नहीं हुआ और करीब 10 बजे उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन ने मजिस्ट्रेट की तैनाती की है और सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की जा रही हैं। शव को रिम्स के ट्रॉमा सेंटर स्थित मोर्चरी में रखा गया है और मेडिकल बोर्ड के गठन के बाद पोस्टमार्टम कराया जाएगा। प्रशांत बोस मूल रूप से पश्चिम बंगाल के निवासी थे और माओवादी आंदोलन के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते थे। उन्हें संगठन का प्रमुख रणनीतिकार और विचारक माना जाता था। माओवादी सर्कल में वे ‘मनीष’ और ‘बुद्धा’ जैसे नामों से भी जाने जाते थे।

करीब चार दशकों तक सक्रिय रहे बोस सीपीआई-माओवादी की केंद्रीय समिति और पोलित ब्यूरो के प्रमुख सदस्य थे तथा पूर्वी क्षेत्रीय ब्यूरो के सचिव भी रह चुके थे। उन्हें संगठन में शीर्ष नेतृत्व के बाद दूसरा सबसे प्रभावशाली नेता माना जाता था। प्रशांत बोस को 12 नवंबर 2021 को उनकी पत्नी शीला मरांडी के साथ सरायकेला-खरसावां जिले के कांड्रा(गिद्दीबेड़ा) टोल ब्रिज के पास गिरफ्तार किया गया था। उन पर एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, वे झारखंड समेत कई राज्यों में 200 से अधिक माओवादी घटनाओं में शामिल रहे थे। उनके निधन के बाद क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और प्रशासन पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए है।









