सरायकेला : मंगलवार को शहीद भगत सिंह स्मारक समिति की ओर से शहीद भगत सिंह स्मृति समारोह 2026 – सांस्कृतिक कार्यक्रम सह पुरस्कार वितरण समारोह का कार्यक्रम कुकड़ू प्रखंड अंतर्गत सिरूम पंचायत भवन परिसर में संपन्न किया गया। कार्यक्रम में विगत 28 मार्च को विभिन्न स्कूलों के कक्षा 6 से 8वीं तक के बच्चों के बीच आयोजित सामान्य अध्ययन व गायन प्रतियोगिता में प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त किये बच्चों को पुरस्कृत किया गया। शहीद भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरू के फोटो पर माल्यार्पण के पश्चात कार्यक्रम में उपस्थित मुख्य अतिथि शिक्षक रवींद्रनाथ मछुआ ने कहा कि शहीद भगत सिंह का जीवन संघर्ष आज भी प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने बच्चों से अपील किया कि सही शिक्षा से लेस होना पड़ेगा तभी हमलोग भगत सिंह के सपनों को पुरा कर पाएंगे ।

कार्यक्रम में शहीद भगत सिंह स्मारक समिति के अध्यक्ष व वरिष्ठ शिक्षक पप्पू चंद्र प्रमाणिक ने कहा कि शहीद भगत सिंह हमारे बीच नही है, लेकिन उनका विचार आज भी जिंदा है। हमें इस तरह का कार्यक्रम आयोजित करके भगत सिंह के विचार को छात्रों- नौजवानो के बीच ले जाने की जरूरत है। वहीं, रांची विश्वविद्यालय के शोधार्थी व समाजसेवी अनंत कुमार महतो ने कहा कि भगत सिंह और उनके साथियों ने एक ऐसे भारत का सपना देखा था, जहाँ शोषण न हो, इंसान की पहचान धर्म-जाति से नहीं बल्कि इंसानियत से हो, और हर व्यक्ति को रोटी, कपड़ा और मकान मिले। लेकिन आजादी के बाद भी गरीबी, बेरोजगारी, महंगाई, अशिक्षा, भ्रष्टाचार और बढ़ते अपराध जैसी समस्याएँ बनी हुई हैं।

आज भी मूलभूत सुविधाएँ पूरी तरह सब तक नहीं पहुँच पाई हैं। शासक वर्ग द्वारा भगत सिंह जैसे क्रांतिकारियों के विचारों को दबाने और भुलाने की कोशिश की जा रही है। युवाओं को भटकाने के लिए भोगवादी संस्कृति को बढ़ावा दिया जा रहा है। स्कूलों को बंद कर शराब दुकानों को खोला जा रहा है, अश्लील सिनेमा साहित्य, अग्रेसिव गेम्स और हिंसक वेब सीरीज को बढ़ावा देकर छात्रों के चारित्रिक गुणों को नष्ट कर हिंसक और असंवेदनशील बनाया जा रहा है। इसीलिए आज जरूरत है इन साजिशों को बेनकाब करने की साथ ही भगत सिंह के विचारों को अपनाने की है।

कार्यक्रम को वरिष्ठ शिक्षक खेलाराम बेदिया, अनादि कुमार, समाजसेवी आशुदेव महतो, समाजसेवी सुनील महतो ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम में मुखिया मजीत सिंह भी मौजूद थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता परेश चंद्र महतो और संचालन विशेश्वर महतो ने किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में सुधीर महतो, बीरसिंह महतो, बिरेन महतो, राहुल महतो का अहम योगदान रहा।









