सरायकेला: झारखंड में बढ़ती गर्मी और लू को देखते हुए स्कूलों के समय निर्धारण को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। कुकड़ू प्रखंड के समाजसेवी शिक्षक गुणाधर महतो ने इस पर चिंता जताते हुए कहा कि ग्रीष्मकाल में विद्यार्थियों को तेज धूप और लू से बचाने के लिए प्रातःकालीन शैक्षणिक सत्र आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सुबह के समय तापमान अपेक्षाकृत कम रहता है, जबकि दोपहर में भीषण गर्मी और लू चलती है, जिससे बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में स्कूलों का समय सुबह निर्धारित करना बच्चों के हित में होगा। आगे यह भी कहा कि कोरोना काल के दौरान पढ़ाई के नुकसान की भरपाई के लिए वर्ष 2022-23, 2023-24 और 2024-25 तक अतिरिक्त शैक्षणिक समय दिया गया था, जिसकी अब भरपाई हो चुकी है। इसके बावजूद पुराने समयावधि को ही जारी रखना व्यावहारिक नहीं है।
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ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अधिकांश विद्यार्थी गांवों से आते हैं, जहां सुबह जल्दी नहाकर विद्यालय पहुंचना और दोपहर में लौटकर दिनचर्या संभालना कठिन हो जाता है। इससे बच्चों की दिनचर्या और स्वास्थ्य दोनों प्रभावित होते हैं। शिक्षक संघों द्वारा भी इस संबंध में आवेदन दिए जाने के बावजूद अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। इसको लेकर शिक्षकों और अभिभावकों में चिंता बनी हुई है। उन्होंने सरकार और शिक्षा विभाग से मांग की है कि विद्यार्थियों के हित को ध्यान में रखते हुए जल्द ही स्पष्ट निर्णय लिया जाए, ताकि किसी प्रकार की असुविधा न हो और बच्चे सुरक्षित वातावरण में अपनी पढ़ाई जारी रख सकें।









