77वां गणतंत्र दिवस : गणतंत्र और हम

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खबर झारखंड डेस्क: 26 जनवरी भारत के इतिहास का वह गौरवशाली दिन है, जब देश ने केवल राजनीतिक स्वतंत्रता ही नहीं, बल्कि संवैधानिक आत्मनिर्भरता भी प्राप्त की। वर्ष 1950 में इसी दिन भारत का संविधान लागू हुआ और देश एक संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक गणराज्य बना। आज, 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर यह आत्ममंथन आवश्यक है कि गणतंत्र का अर्थ क्या है और उसमें हमारी भूमिका क्या है।

गणतंत्र दिवस क्यों मनाया जाता है?

गणतंत्र दिवस इसलिए मनाया जाता है.. क्योंकि 26 जनवरी 1950 को भारत ने अपने संविधान को अपनाया। यही वह दिन है, जब शासन की सर्वोच्च शक्ति जनता के हाथों में सौंपी गई। यह दिन हमें याद दिलाता है कि भारत में कोई राजा या शासक सर्वोपरि नहीं, बल्कि संविधान सर्वोच्च है। 26 जनवरी की तिथि का चयन भी ऐतिहासिक महत्व रखता है। 26 जनवरी 1930 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने पूर्ण स्वराज की घोषणा की थी। स्वतंत्रता के बाद उसी संकल्प को मूर्त रूप देते हुए संविधान को इसी दिन लागू किया गया। इस प्रकार गणतंत्र दिवस स्वतंत्रता संग्राम की भावना और संवैधानिक मूल्यों के बीच सेतु का कार्य करता है।

गणतंत्र केवल व्यवस्था नहीं, जिम्मेदारी है

गणतंत्र केवल शासन प्रणाली नहीं, बल्कि नागरिकों और सत्ता के बीच एक नैतिक अनुबंध है। संविधान हमें मौलिक अधिकार देता है, लेकिन साथ ही कर्तव्यों का स्मरण भी कराता है। दुर्भाग्यवश, समय के साथ अधिकारों की माँग मुखर हुई, पर कर्तव्यों के प्रति संवेदनशीलता कमजोर पड़ी।

लोकतंत्र की आत्मा केवल चुनावों तक सीमित नहीं है। मतदान एक दिन का कर्तव्य है, लेकिन सतत जागरूकता, सवाल पूछने की हिम्मत और जवाबदेही की माँग ही लोकतंत्र को जीवंत बनाती है। जब नागरिक मूक दर्शक बन जाते हैं, तब गणतंत्र की जड़ें कमजोर होने लगती हैं।

आज के भारत की चुनौतियाँ

आज भारत वैश्विक मंच पर एक उभरती शक्ति है। आर्थिक विकास, डिजिटल क्रांति और बुनियादी ढांचे का विस्तार देश की उपलब्धियाँ हैं। पर इसके समानांतर बेरोज़गारी, महँगाई, सामाजिक असमानता, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी चुनौतियाँ भी हमारे गणतंत्र की वास्तविक परीक्षा ले रही हैं।

एक सशक्त गणतंत्र में स्वतंत्र और जिम्मेदार पत्रकारिता की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। मीडिया का कार्य सत्ता का महिमामंडन नहीं, बल्कि जनहित में सवाल उठाना और सच को सामने लाना है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बिना लोकतंत्र केवल एक औपचारिक ढांचा बनकर रह जाता है।

गणतंत्र को मजबूत कौन करता है

गणतंत्र की मजबूती किसी एक संस्था या सरकार पर निर्भर नहीं करती, बल्कि प्रत्येक नागरिक के आचरण से तय होती है। कानून का सम्मान, सामाजिक सौहार्द, भ्रष्टाचार के प्रति असहिष्णुता और मानवीय संवेदना.. यही एक परिपक्व लोकतंत्र की पहचान है।

77 वर्षों की यात्रा के बाद यह प्रश्न हमारे सामने है कि हम गणतंत्र से केवल अपेक्षाएँ रखते हैं या उसे मजबूत करने का दायित्व भी निभाते हैं। गणतंत्र दिवस की सच्ची सार्थकता परेड और समारोहों में नहीं, बल्कि संविधान के मूल्यों.. न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व को अपने जीवन में उतारने में है। यदि हर नागरिक अपने कर्तव्यों के प्रति सजग हो, तो भारत का गणतंत्र न केवल सुरक्षित रहेगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा भी बनेगा।

गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं।

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