पाकुड़ सादर प्रखंड नियम-कानून सिर्फ फाइलों में जिंदा हैं और जमीन पर खुलेआम कुचले जा रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि गांव और स्कूल से मात्र 100 मीटर की दूरी पर, वह भी हाई टेंशन बिजली तार के ठीक नीचे, खनन लीज देकर बच्चों और ग्रामीणों की जिंदगी को सीधे मौत के मुंह में धकेला जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस रास्ते से बच्चे स्कूल जाते हैं, उसी रास्ते पर भारी मशीनें गरजती हैं, ब्लास्टिंग होती है और ऊपर से हाई टेंशन तार झूलते रहते हैं। सवाल यह है कि अगर यहां कोई बड़ा हादसा होता है तो जिम्मेदार कौन होगा? इधर पीपलजोड़ी और सालबोनी में बाबू धन मुर्मू द्वारा लीज एरिया से बाहर जाकर खनन किए जाने का आरोप अब दबे स्वर में नहीं, खुले तौर पर लगाया जा रहा है। ग्रामीणों का दावा है कि तय सीमा को तोड़कर लगातार पत्थर निकाले जा रहे हैं, जिससे पहाड़ खोखले हो चुके हैं और पर्यावरण तबाही की कगार पर पहुंच गया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि अधिकारियों को सब कुछ दिखता है, फिर भी कार्रवाई शून्य है रात के अंधेरे में मशीनें चलती हैं, ट्रक दौड़ते हैं शिकायतों के बाद भी खनन बेरोकटोक जारी है तो सवाल उठना लाज़मी है आखिर सुंदरापाहाड़ी में खनन माफियाओं को किसका संरक्षण हासिल है? क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?









