हिरणपुर प्रखंड के बस्ताडीह इलाके में स्थित मोर मुकुट खदान और क्रेशर ने मानो यह साबित कर दिया है कि पाकुड़ जिले में कानून सिर्फ आम लोगों के लिए है, जबकि खनन माफियाओं के लिए सब कुछ माफ है। आरोप है कि मोर मुकुट द्वारा लीज एरिया से बाहर करीब 10 बीघा जमीन में खुलेआम अवैध खनन किया जा रहा है, फिर भी प्रशासन आंख मूंदे बैठा है। सब कुछ साफ दिखने के बावजूद अब तक कोई कार्रवाई नहीं होना यह सवाल खड़ा करता है कि क्या मोर मुकुट के संचालक कानून से ऊपर हैं? या फिर उनके सिर पर किसी “बड़े हाथ” का खुला संरक्षण है? जानकारी के मुताबिक जिला ट्रांस फोर्स की बैठक में स्पष्ट और कड़े निर्देश दिए गए थे कि रात के समय किसी भी हालत में क्रेशर नहीं चलाया जाएगा लेकिन बस्ताडीह में ये आदेश कागज बनकर रह गए। रात होते ही क्रेशर पूरे शोर-शराबे के साथ चलने लगता है, मानो जिला प्रशासन की चेतावनी मज़ाक हो, स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि
रात भर चलने वाले क्रेशर से नींद हराम है, धूल और कंपन से घरों में दरारें पड़ रही हैं, पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंच रहा है, इसके बावजूद ना खनन विभाग जाग रहा है, ना प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, ना स्थानीय प्रशासन। सवाल सीधा है, जब ऊपर से सख्त निर्देश हैं, तो नीचे कार्रवाई क्यों नहीं? अब यह केवल अवैध खनन का मामला नहीं रहा, यह प्रशासनिक मिलीभगत और संरक्षण का गंभीर आरोप बन चुका है। पाकुड़ की जनता जानना चाहती है क्या नियम-कानून सिर्फ गरीबों के लिए बने हैं, क्या अवैध खनन करने वालों को खुली छूट है और कब मोर मुकुट जैसे खदानों पर असली कार्रवाई होगी?









