हिरणपुर — जहाँ बाजार की गलियों में सोने की चमक तो खूब बिखरी है, पर उस चमक के पीछे छिपी काली परछाई अब धीरे-धीरे सामने आने लगी है।
जिस दुकान को लोग अपने शुभ अवसरों के लिए “श्री बालाजी ज्वेलर्स” के नाम से जानते थे, वही आज ठगी, ब्याजखोरी और बेईमानी का पर्याय बनती जा रही है।
💍 सोने की दुकान या मजबूरी का बाजार?
कहा जाता है — “यहाँ गहनों की नहीं, लोगों की मजबूरियों की खरीद-फरोख्त होती है।”
किसी की चूड़ी, किसी का मंगलसूत्र, किसी की यादें — सब कुछ बंधक रखे जाते हैं, और बदले में मिलता है हर महीने चार प्रतिशत ब्याज का जाल।
गरीब और मध्यमवर्गीय महिलाएँ जब अपने मुश्किल वक्त में यहाँ आती हैं, तो लौटते वक्त सिर्फ जेवर नहीं, अपनी आत्मा भी गिरवी रख आती हैं।
💸 3% का रहस्यमयी ‘जीएसटी’ – या नया खेल?
अब खेल और गहराया है।
ग्राहक जब कार्ड या यूपीआई से भुगतान करते हैं, तो उनसे 3% अतिरिक्त जीएसटी वसूला जाता है।
पर न कोई रसीद, न कोई हिसाब — सवाल ये उठता है कि
> “जब सरकार का टैक्स पहले से तय है, तो यह नया टैक्स किसकी जेब में जा रहा है?”
कानून तो साफ कहता है कि GST केवल सरकार वसूल सकती है, लेकिन लगता है हिरणपुर में कानून का सिक्का अब नहीं चलता — सिर्फ बालाजी का “निजी टैक्स” ही चलता है।
🚨 छापेमारी और शटर गिराने की कहानी
कुछ दिन पहले, अन्य राज्य की पुलिस ने इस ज्वेलरी शॉप पर छापेमारी की थी।
जैसे ही खबर फैली, दुकान के शटर झट से गिरा दिए गए।
उसके बाद सब कुछ “चुप्पी की चमक” में दबाने की कोशिश की गई।
मगर अफवाह नहीं, अब ये जनता की जुबान का सच बन चुका है।
अब हर राहगीर कहता है —“हिरणपुर का श्री बालाजी अब ‘ज्वेलर्स’ नहीं, ‘जालसाज जंक्शन’ बन गया है।”
🧾 प्रशासन की आंखों के सामने… लेकिन कार्रवाई गायब
स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह सब कुछ प्रशासन की नाक के नीचे हो रहा है।
गाँव की महिलाओं के गहनों पर बैंक से भी ज़्यादा ब्याज, और जब कोई सवाल पूछे तो जवाब मिलता है — “नियम यही है। सवाल उठता है —क्या श्री बालाजी ज्वेलर्स के लिए अलग कानून बना है?
क्या जिला प्रशासन को ये सब नहीं दिखता?
और वो अतिरिक्त जीएसटी, क्या कभी सरकारी खाते तक पहुँचता है?
🕵️♂️ जांच की मांग – जनता की आवाज़
अब हिरणपुर की गलियों में सोने की नहीं, सवालों की चमक है।
लोग खुलकर कह रहे हैं — “अगर सब कुछ सही है, तो श्री बालाजी ज्वेलर्स अपनी बहीखाते सार्वजनिक करे!”
जनता चाहती है कि जिला प्रशासन, कर विभाग और स्वतंत्र एजेंसियाँ इस पूरे मामले की गहराई से जांच करें —
कि आखिर इस सुनहरी दुकान की नींव में कितना गरीबों का खून और पसीना दफन है।
⚖️ अंतिम पुकार – कानून की चमक वापस लाओ
हिरणपुर अब यह जानना चाहता है कि क्या कानून की रोशनी अभी बाकी है?
लोग प्रशासन से अपील कर रहे हैं — “जांच कीजिए, कार्रवाई कीजिए, और साबित कीजिए कि चमक केवल सोने की नहीं, न्याय की भी होती है।”
🌕 कहानी का सार:
जिस जगह पर गहनों की चमक भरोसे की पहचान थी,
वहीं आज शक की परछाई हर ग्राहक की आंखों में उतर आई है।
हिरणपुर का श्री बालाजी ज्वेलर्स —
अब सिर्फ एक दुकान नहीं, एक सवाल बन चुका है।









