जमशेदपुर : कोल्हान प्रमंडल के दलमा तराई क्षेत्र स्थित माकुला कोचा और आसपास के गांवों में इन दिनों आक्रोश का माहौल है। ग्रामीणों ने दलमा सेंचुरी क्षेत्र में चल रही कथित “गज परियोजना” पर सवाल उठाते हुए इसे पूरी तरह से संसाधनों की लूट करार दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि वन विभाग ने विकास योजनाओं का दिखावा कर लगभग एक एकड़ क्षेत्र में हजारों साल पुराने साल के पेड़ों की अवैध कटाई कर दी। यह घटना सिर्फ जंगल और पर्यावरण के खिलाफ अपराध नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के साथ सीधा विश्वासघात भी है।
ग्रामीणों का आरोप है कि वर्षों से उन्हें विकास का भरोसा दिया गया, लेकिन सच्चाई यह है कि आज भी गांवों की सड़कें बदहाल हैं। बुनियादी सुविधाएं अधूरी पड़ी हैं, वहीं दूसरी ओर हरियाली से लहलहाते साल के जंगल को निजी स्वार्थ में उजाड़ दिया गया। उनका कहना है कि यह पूरा मामला छलावे का है और ग्रामीणों को लगातार धोखा दिया जा रहा है। इस मुद्दे पर दलमा क्षेत्र ग्रामसभा सुरक्षा मंच ने बैठक की, जिसमें ग्रामीण प्रतिनिधियों ने साफ कहा कि हमारे जंगल और प्राकृतिक धरोहर को किसी कीमत पर बर्बाद नहीं होने देंगे।
ग्रामीणों की मांगों को जानिए
ग्रामीणों ने अपनी चार प्रमुख मांगें रखीं। पहली, इस पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराई जाए ताकि सच सामने आ सके।
दूसरी, कटे हुए पेड़ों का पूरा ब्योरा डीएफओ (वन प्रभागीय पदाधिकारी) सार्वजनिक करें और इसे जनता के सामने रखा जाए।
तीसरी, इस कृत्य में शामिल दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।
चौथी और सबसे महत्वपूर्ण मांग यह कि भविष्य में बिना ग्रामसभा की सहमति एक भी पेड़ न काटा जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि जब तक ग्रामसभा की अनुमति नहीं होगी, जंगल से संबंधित कोई भी फैसला स्वीकार नहीं किया जाएगा।
गज परियोजना के नाम पर प्राकृतिक संसाधनों की लूट: सुकलाल पहाड़िया
बैठक में ग्रामसभा सुरक्षा मंच के प्रतिनिधि सुकलाल पहाड़िया ने कहा कि दलमा सेंचुरी में गज परियोजना के नाम पर प्राकृतिक संसाधनों की लूट हो रही है। इसे अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। साल के पेड़ हमारी संस्कृति, परंपरा और जीवन का हिस्सा हैं। इन्हें बचाना हमारी जिम्मेदारी है। इसी मंच से गुरुचरण कर्मकार, शक्तिपद हांसदा और मंगल मार्डी समेत कई ग्रामीण नेताओं ने भी अपनी बात रखी और एक स्वर में विरोध जताया। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो वे सड़क पर उतरकर बड़ा आंदोलन करेंगे। उन्होंने साफ कर दिया कि आंदोलन की पूरी जिम्मेदारी वन विभाग की होगी।









