सरायकेला। सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था सुधारने के दावों की पोल ईचागढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) और तिरुलडीह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) की जमीनी हकीकत खोल रही है। दोनों स्वास्थ्य केंद्रों पर चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों की भारी कमी है। स्थिति इतनी बदतर है कि ईचागढ़ सीएचसी में केवल एक चिकित्सक के भरोसे पूरे प्रखंड का इलाज चल रहा है, जबकि तिरुलडीह पीएचसी पूरी तरह से चिकित्सक विहीन हो चुका है। लेकिन शासन-प्रशासन पूरी तरह मौन है।
ईचागढ़ सीएचसी में 44 स्वीकृत पद, 36 खाली
ईचागढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में कुल 44 स्वीकृत पद हैं, लेकिन इनमें से 36 खाली पड़े हैं। यहां कामकाज महज़ 7 कर्मचारियों के सहारे चल रहा है। सबसे गंभीर बात यह है कि पूरे केंद्र में सिर्फ एक चिकित्सक और एक दंत चिकित्सक मौजूद हैं। ग्रामीणों ने बताया कि आपातकालीन स्थिति में उन्हें मजबूरन निजी अस्पताल का सहारा लेना पड़ता है, जिससे कई बार मरीजों की जान जोखिम में पड़ जाती है।

तिरुलडीह पीएचसी में डॉक्टर शून्य, सिर्फ 3 नर्सों पर जिम्मेदारी
कुकड़ू प्रखंड के तिरुलडीह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का हाल और भी गंभीर है। यहां 11 स्वीकृत पदों में से 7 खाली हैं। स्थिति तब और बिगड़ी जब यहां पदस्थापित एकमात्र चिकित्सक डॉ. हरेंद्र सिंह मुंडा को 7 अगस्त 2025 को ईचागढ़ सीएचसी में प्रतिनियुक्त कर दिया गया। उसके बाद से पूरा केंद्र केवल तीन नर्सों के भरोसे चल रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि डॉक्टर न होने के कारण साधारण बीमारी तक का इलाज भी मुश्किल हो गया है।
ग्रामीणों की गुहार, अस्पताल में डॉक्टर दें दो सरकार
समय पर इलाज न मिलने से कई बार गंभीर मरीजों को जान से हाथ धोना पड़ सकता है। मजबूरी में उन्हें रांची और जमशेदपुर के निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता है, जो न तो सभी के लिए आसान है और न ही सस्ता। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और सरकार से मांग की है कि तुरंत दोनों केंद्रों पर डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मियों की पदास्थापना की जाए, ताकि लोगों को गांव-घर पर ही स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध हो सके।









