20 अगस्त 2025, सरायकेला: ईचागढ़ प्रखंड स्थित प्रसिद्ध देवलेटांड़ जैन मंदिर तक पहुंचने के लिए लोगों को अब भी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। राड़गांव से सीधे मंदिर तक सड़क निर्माण कार्य का शिलान्यास 24 मार्च 2023 को केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने रांची से ऑनलाइन किया था। निर्माण कार्य की लागत राशि 2 करोड़ 10 लाख 61 हजार 177 रुपये और लंबाई करीब 2 किलोमीटर तय की गई थी। लेकिन शिलान्यास के दो वर्ष बाद भी काम धरातल पर शुरू नहीं हो सका है। विभाग, सरकार और प्रशासन की चुप्पी से ग्रामीणों और श्रद्धालुओं में नाराज़गी लगातार बढ़ रही है।

लोगों को लगाना पड़ता है 15 किलोमीटर का चक्कर
फिलहाल राड़गांव से देवलेटांड़ जैन मंदिर जाने के लिए श्रद्धालुओं को लगभग 15 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ता है। खासकर बुजुर्गों और बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह यात्रा और भी कठिन हो जाती है। सड़क बन जाने पर दूरी काफी कम हो जाएगी और लोगों की आवाजाही सरल हो जाएगी।स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि हर बार नेताओं और अधिकारियों से सिर्फ वादे सुनने को मिलते हैं। चुनाव के समय सड़क निर्माण की बातें होती हैं, लेकिन हकीकत यह है कि अब तक कोई ठोस पहल नहीं दिखी। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क बनने से न केवल श्रद्धालुओं को सुविधा मिलेगी बल्कि आसपास के गांवों को भी सीधा लाभ मिलेगा।

पर्यटन और विकास पर असर
देवलेटांड़ जैन मंदिर धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। रांची से 70 किलोमीटर और जमशेदपुर से 75 किलोमीटर दूर स्थित यह मंदिर हर साल हज़ारों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र रहता है। सड़क बनने से न केवल श्रद्धालुओं की परेशानी दूर होगी बल्कि धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। इससे स्थानीय दुकानदारों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सहारा मिलेगा।

ग्रामीणों ने सौंपा आवेदन, आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों का कहना है कि जब शिलान्यास हो चुका है और जमीन विवाद भी लगभग सुलझ चुका है तो काम शुरू करने में देरी क्यों की जा रही है। विभाग, सरकार और प्रशासन की चुप्पी पर लोग लगातार सवाल उठा रहे हैं। ग्रामीणों ने सरायकेला-खरसावां जिला उपायुक्त को हस्ताक्षरयुक्त आवेदन सौंपकर निर्माण कार्य शीघ्र शुरू कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जल्द पहल नहीं हुई तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।

राड़गांव से देवलेटांड़ जैन मंदिर तक सड़क निर्माण आस्था और विकास, दोनों के लिहाज़ से अहम है। लेकिन शिलान्यास के दो साल बाद भी काम शुरू न होना सरकार की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। ग्रामीण अब उम्मीद कर रहे हैं कि विभाग जल्द ठोस कदम उठाए और यह बहुप्रतीक्षित सड़क हकीकत में बदल सके।









