15 वें वित्त आयोग के तहत वित्तीय वर्ष 2025-26 में मिले 2254 करोड़
रांची : विकसित गांव और समृद्ध झारखंड का सपना अब साकार होने जा रहा है। झारखंड के 4345 पंचायतों पर वित्तीय वर्ष 2025 – 26 में छप्पर फाड़ पैसे की बारिश हुई है। राशि के अभाव में पिछड़ रहे गांव, अब विकास की रफ्तार भरने को तैयार है। वित्तीय वर्ष 2025 – 26 के अंत तक झारखंड को 15 वें वित्त आयोग के तहत करीब 2254 करोड़ रुपए की राशि प्राप्त हुई है। इस राशि को राज्य के पंचायतों को मिलने वाली राशि के नजरिए से आंके तो हर एक पंचायत के हिस्से में पिछले एक साल में करीब 51 लाख 80 हजार रुपए आयेंगे। ये राशि राज्य गठन के बाद से अब तक मिलने वाली सर्वाधिक राशि है . सबसे बड़ी उपलब्धि ये है कि राज्य वित्त आयोग से पहली बार पंचायतों को अनुदान राशि दी गई है. 15 वें वित्त आयोग से झारखंड का हिस्सा लेने में लंबी प्रक्रिया से हो कर गुजरना पड़ा। राज्य की ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह के अथक प्रयास , केंद्र सरकार के साथ लगातार पत्राचार, केंद्रीय सचिव और केंद्रीय मंत्री के साथ बैठक के बाद ये संभव हो पाया है।
राज्य गठन के बाद पंचायतों को हिस्से में आई सबसे ज्यादा राशि
15 वें वित्त आयोग के तहत झारखंड के हिस्से में मिलनी वाली राशि पर गौर करें , तो वित्तीय वर्ष 2021 – 22 में 624 . 50 करोड़ , वित्तीय वर्ष 2022 – 23 में 1271 करोड़ , वित्तीय वर्ष 2023 – 24 में 1300 करोड़ , वित्तीय वर्ष 2024 – 25 में 653 . 50 करोड़ , जबकि वित्तीय वर्ष 2025 – 26 में ये राशि सर्वाधिक 2254 करोड़ रुपए राज्य के पंचायतों को मिला है। राज्य के सभी पांच प्रमंडलों में इस राशि को बांटे तो उत्तरी छोटा नागपुर प्रमंडल को – 767. 15 करोड़ रुपए, संथाल परगना प्रमंडल को – 520 . 59 करोड़ रुपए, दक्षिणी छोटा नागपुर प्रमंडल को 367 . 78 करोड़ रुपए, कोल्हान प्रमंडल को – 300 . 44 करोड़ और पलामू प्रमंडल को – 294 . 74 करोड़ रुपए मिले है।
गांव के विकास को मिलेगी रफ्तार
झारखंड के गांव के विकास में 2254 करोड़ रुपए विभिन्न योजना मद में खर्च होंगे। लंबे इंतजार के बाद पंचायत स्तर पर गांव के विकास की योजना धरातल पर आकार लेती हुई दिखेगी। जहां टाइड मद से पेयजल एवं स्वच्छता से जुड़ी योजनाओं का लाभ ग्रामीणों को मिल सकेगा। वहीं अन टाइड मद के तहत गांव के विकास और ग्रामीणों की जरूरत से जुड़ी योजनाएं शामिल है।
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी के सपनों को साकार करने की दिशा में सफल कोशिश: दीपिका पांडेय सिंह
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी ने कहा था ” भारत की आत्मा गांवों में बसती है “। देश का सच्चा विकास तभी संभव है जब गांवों का विकास हो और वो आत्मनिर्भर बनें। झारखंड महात्मा गांधी जी की सोच के साथ गांव की सूरत बदलने की राह पर निकल चुका है। 15 वें वित्त आयोग से झारखंड के हिस्से की मिलने वाली राशि के लिए काफी जद्दोजहद करना पड़ा . पिछले एक साल में राज्य के पंचायतों को 2254 करोड़ रुपए का मिलना सचमुच में अप्रत्याशित है। ये पैसा गांव और गांव में रहने वाले लोगों की जिंदगी में बड़ा बदलाव लाने में सफल साबित होगा। इसके लिए पंचायत के जनप्रतिनिधियों को पूरी निष्ठा और ईमानदारी से योजना का चयन करने से लेकर उसे धरातल पर उतारने में अपनी भूमिका अदा करनी होगी।









