रांची। झारखंड विधानसभा में सदन के अंदर शून्यकाल की कार्यवाही के दौरान विधायक अमित महतो और जयराम महतो ने जेपीएससी में अधिकतम आयु सीमा की गणना का मुद्दा उठाया। दोनों विधायकों ने कहा कि जेपीएससी में अधिकतम आयु सीमा की गणना के लिए 1 अगस्त 2026 को आधार तिथि निर्धारित की गई है, जबकि इससे पहले वर्ष 2017 को आधार वर्ष माना गया था।उन्होंने कहा कि छात्रहित को ध्यान में रखते हुए अधिकतम आयु सीमा की गणना वर्ष 2018 से की जानी चाहिए, ताकि अधिक से अधिक अभ्यर्थियों को अवसर मिल सके। विधायकों ने सरकार से इस मामले में पुनर्विचार करने और छात्रों के हित में उचित निर्णय लेने की मांग की।
वहीं, सदन में सूचना के माध्यम से कांग्रेस विधायक दल नेता प्रदीप यादव ने जेपीएससी में अधिकतम आयु सीमा की गणना 1 अगस्त 2026 के बजाय वर्ष 2018 से किए जाने की मांग उठाई। विधायक ने सदन में कहा कि वर्ष 2023 में जब जेपीएससी की परीक्षा आयोजित हुई थी, तब अधिकतम आयु सीमा की गणना वर्ष 2017 के आधार पर की गई थी। अब वर्ष 2026 में पुनः जेपीएससी की परीक्षा आयोजित की जा रही है और इस बार 2026 को आधार तिथि बनाया गया है, जिससे करीब 9 वर्षों का अंतर हो रहा है।
उन्होंने कहा कि जिन अभ्यर्थियों ने इस मामले को लेकर उच्च न्यायालय का रुख किया था, उन्हें आवेदन करने की अनुमति दी गई है, लेकिन जो अभ्यर्थी न्यायालय नहीं गए थे, वे इससे वंचित रह गए हैं। यह स्थिति छात्रहित के खिलाफ है। इस पर जवाब देते हुए संसदीय कार्य मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने कहा कि यह एक गंभीर विषय है और इस पर हाल ही में कैबिनेट की बैठक में चर्चा की गई है। उन्होंने कहा कि जो अभ्यर्थी उच्च न्यायालय नहीं गए थे, उन सभी को पूरा सहयोग दिलाने का प्रयास सरकार की ओर से किया जाएगा।









