सरायकेला जिले में 292 सहायक आचार्यों की पदस्थापना पर सवाल, नियमों की अनदेखी का आरोप, तो क्या सेटिंग से हुई है पोस्टिंग? पढ़िए पूरी खबर और जानिए आरोप…..

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सरायकेला : सरायकेला-खरसावां जिला शिक्षा स्थापना समिति द्वारा सरायकेला-खरसावां जिले में नव नियुक्त 292 सहायक आचार्यों का पदस्थापन कर विद्यालयों का आवंटन किया गया है। इसमें कक्षा छह से आठ के लिए गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान व भाषा विषय के कुल 178 सहायक आचार्य तथा कक्षा एक से पांच के लिए 114 सहायक आचार्य शामिल हैं। पदस्थापना के आंकड़ों के अनुसार कक्षा छह से आठ में सबसे अधिक 40 सहायक आचार्यों का पदस्थापन चांडिल प्रखंड में किया गया है, जबकि सबसे कम 6 सहायक आचार्यों का पदस्थापन खरसावां प्रखंड में हुआ है। वहीं कक्षा एक से पांच के लिए सबसे अधिक सहायक आचार्य गम्हरिया प्रखंड को मिले हैं, जहां 21 सहायक आचार्यों की पदस्थापना की गई है। सबसे कम 5 सहायक आचार्यों की पदस्थापना नीमडीह प्रखंड में हुई है।

हालांकि पदस्थापना के बाद भी जिले के कई प्राथमिक एवं मध्य विद्यालय आज भी शिक्षकों की भारी कमी से जूझ रहे हैं। कई विद्यालय ऐसे हैं जो मात्र एक पारा शिक्षक के भरोसे संचालित हो रहे हैं, जबकि कुछ विद्यालयों में एक भी शिक्षक नहीं होने के कारण विभाग द्वारा अन्य विद्यालयों के पारा शिक्षकों को प्रतिनियोजन पर भेजकर विद्यालय का संचालन कराया जा रहा है।

तो क्या पदस्थापना में विभागीय नियमों का पालन नहीं हुआ?

आरोप है कि पदस्थापना में विभागीय नियमों का पालन नहीं किया गया। नियम के अनुसार वर्तमान में किसी एक विद्यालय में प्राथमिक अथवा उच्च प्राथमिक स्तर पर दो से अधिक सहायक आचार्यों की पदस्थापना नहीं की जानी चाहिए, जबकि कई विद्यालयों में एक ही कक्षा स्तर पर पांच-पांच सहायक आचार्यों की पोस्टिंग कर दी गई है। वहीं कई विद्यालय ऐसे भी हैं, जहां एक भी सहायक आचार्य की पदस्थापना नहीं हुई है।

आखिर क्यों नहीं किया गया गृह प्रखंड में पोस्टिंग?

पदस्थापना में गृह प्रखंड में पोस्टिंग की नीति का भी पालन नहीं होने का आरोप लगाया गया है। कई शिक्षकों को उनके गृह प्रखंड से 60 से 80 किलोमीटर दूर पदस्थापित कर दिया गया है। विशेष रूप से ऐसे पारा शिक्षकों(सहायक शिक्षक) कोटे से बहाल हुए शिक्षिकों को, जिनकी सेवा में मात्र 4 से 6 वर्ष शेष हैं, नौकरी के अंतिम पड़ाव में घर से काफी दूर विद्यालय आवंटित किए जाने से असंतोष व्याप्त है।

 

एक ही स्कूल में एक विषय के दो शिक्षकों की पोस्टिंग कैसे?

इसके अलावा कई विद्यालयों में एक ही विषय के दो-दो शिक्षकों की पदस्थापना कर दी गई है। उदाहरण के तौर पर ईचागढ़ प्रखंड के मध्य विद्यालय जाहिरडीह में गणित-विज्ञान विषय में दो शिक्षकों की एक ही विद्यालय में पोस्टिंग की गई है। वहीं गम्हरिया प्रखंड के उच्च मध्य विद्यालय कमलपुर में सामाजिक विज्ञान विषय में दो शिक्षकों की पदस्थापना की गई है।

छात्र संख्या के अनुपात में भी भारी असंतुलन सामने आया है। कहीं मात्र 40 विद्यार्थियों पर दो-दो सहायक आचार्य तैनात हैं, तो कहीं 300 से अधिक विद्यार्थियों वाले विद्यालयों में एक भी सहायक आचार्य नहीं दिया गया है। मध्य विद्यालय कुकड़ू और मध्य विद्यालय चौड़ा उर्दू इसके उदाहरण बताए जा रहे हैं।

इतना ही नहीं, पदस्थापना सूची में कई विद्यालयों के नामों में त्रुटियां होने का भी आरोप है। कुछ ऐसे विद्यालयों के नाम भी सूची में दर्ज हैं, जो इस जिले में अस्तित्व में ही नहीं हैं।

तो क्या सेटिंग से हुई है पोस्टिंग?

सूत्रों के अनुसार गम्हरिया प्रखंड में कई शिक्षकों ने कथित तौर पर “सेटिंग” के जरिए मनचाही पोस्टिंग कराई है। बताया जाता है कि कुछ शिक्षक सरकारी विद्यालय में पढ़ाने के बजाय अपने बच्चों को गम्हरिया क्षेत्र के निजी विद्यालयों में पढ़ाने की सुविधा को ध्यान में रखते हुए वहीं पदस्थापन कराने में सफल रहे हैं।

पूरे मामले को लेकर शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों, अभिभावकों और शिक्षकों ने पदस्थापना की पुनः समीक्षा कर छात्र संख्या, विद्यालय की आवश्यकता और नियमों के अनुरूप पारदर्शी ढंग से सहायक आचार्यों की पदस्थापना की मांग की है।

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