बुधवार की दोपहर सूरज सिर पर था, सड़क पर धूल उड़ रही थी, और तभी एक ट्रक पत्थर चिप्स से लदा हुआ धीरे-धीरे तुरसाडीह गांव के पास पहुंचा। स्टीयरिंग पर बैठा था पवन कुमार, बिहार के पूर्णिया जिले के जानकी नगर का रहने वाला मेहनतकश चालक। उसका बस इतना कसूर था कि उसने सड़क पर मवेशी चरा रहे लोगों से रास्ता खाली करने को कहा।
पर किसे पता था, यही एक शब्द उसकी ज़िंदगी का सबसे दर्दनाक पल बन जाएगा।
गांव के कुछ लोगों ने अचानक गुस्से में आकर पवन पर हमला बोल दिया। पहले गाली-गलौज, फिर लात-घूंसे, और कुछ ही पलों में बांस-डंडों की बौछार… ट्रक चालक सड़क पर गिर पड़ा। दर्द से कराहते हुए उसने उठने की कोशिश की, मगर उसका पैर टूट चुका था।
मारपीट की खबर गांव में जंगल की आग की तरह फैल गई। आसपास के लोग मौके पर दौड़े। किसी ने पुलिस को सूचना दी। हिरणपुर थाना की टीम तुरंत वहां पहुंची। घायल पवन कुमार को एंबुलेंस से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, हिरणपुर लाया गया, जहां डॉ. मनोज कुमार ने उसका प्राथमिक उपचार किया। हालत गंभीर देख डॉक्टरों ने उसे बेहतर इलाज के लिए रेफर कर दिया।
इस बीच पुलिस ने मौके से कुछ लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया और मामले की जांच शुरू कर दी है।
टूटी सड़क, टूटा पैर — लेकिन सबसे ज़्यादा टूटा है उस मजदूर का भरोसा, जो रोज़ी की तलाश में मीलों दूर सफर करता है, और लौटता है जख्मों के साथ।
तुरसाडीह की इस घटना ने फिर साबित कर दिया कि सड़क पर सफर करने वाले मजदूरों और चालकों की ज़िंदगी अब पहले जैसी सुरक्षित नहीं रही।









