हिरणपुर का श्री बालाजी ज्वेलर्स, बाहर से सुनहरी रोशनी में नहाया हुआ, अंदर से शिकायतों और संदेहों की कालिख से लथपथ है। वो दुकान जो लोगों की खुशियों के लिए “शगुन” का प्रतीक मानी जाती थी, आज उसी जगह से ठगी, ब्याजखोरी और मनमानी वसूली की कहानियाँ निकल रही हैं।
स्थानीय लोग बताते हैं — “यहाँ गहनों की नहीं, लोगों की मजबूरियों की खरीद-फरोख्त होती है।”
किसी का मंगलसूत्र बंधक, किसी की चूड़ियाँ गिरवी — और बदले में चार प्रतिशत ब्याज की मार। वो भी हर महीने। गरीब और मध्यम वर्ग की महिलाएँ जब मुश्किल वक़्त में अपने जेवर लेकर पहुँचती हैं, तो वहीं से शुरू होता है उनकी मजबूरी का सौदा। कहा जाता है — “यहाँ सोना गिरवी रखिए, मगर आत्मा भी तैयार रखिए।”
इतना ही नहीं, अब मामला और गहराया है। ऑनलाइन भुगतान करने पर 3% अतिरिक्त जीएसटी वसूला जा रहा है।
ग्राहकों का कहना है — “जब सरकार का टैक्स पहले से लागू है, तो फिर यह नया टैक्स किस खाते में जा रहा है?” सवाल बड़ा है, लेकिन जवाब कहीं गहनों की चमक में गुम हो गया है।
कानून कहता है कि GST सिर्फ सरकार का अधिकार है। पर यहाँ कानून का सिक्का शायद चलना बंद हो गया है।
जो ग्राहक कार्ड या यूपीआई से भुगतान करते हैं, उनसे तीन प्रतिशत अतिरिक्त रकम ले ली जाती है — और न कोई रसीद, न कोई हिसाब। यह रकम कहाँ जाती है? सरकारी खज़ाने में या किसी की जेब में — यह जांच का विषय है।
कुछ दिन पहले अन्य राज्य की पुलिस ने इसी ज्वेलरी शॉप पर छापेमारी की थी।
जैसे ही छापेमारी की भनक लगी, दुकान के शटर गिरा दिए गए, और मामला दबाने की कोशिश की गई। लेकिन बात अब स्थानीय लोगों की ज़ुबान पर है।
हर ग्राहक की जुबान पर एक ही बात — “हिरणपुर का श्री बालाजी अब ‘ज्वेलर्स’ नहीं, ‘जालसाज जंक्शन’ बन गया है।”
लोगों का आरोप है कि यह सब कुछ प्रशासन की नाक के नीचे हो रहा है। अगर किसी गरीब महिला के दो तोले के गहने बंधक हैं, तो उससे ऐसे ब्याज वसूले जा रहे हैं, जैसे बैंक नहीं किसी सूदखोर का गिरोह चल रहा हो। और जब कोई सवाल पूछे, तो जवाब मिलता है — “नियम यही है।”
अब जनता सवाल पूछ रही है —
> “क्या श्री बालाजी ज्वेलर्स के लिए कोई अलग कानून बना है?”
“क्या जिला प्रशासन को ये मनमानी दिखाई नहीं देती?”
“और जो तीन प्रतिशत का अतिरिक्त जीएसटी वसूला जा रहा है — क्या उसका कोई सरकारी रिकॉर्ड है?”
हिरणपुर की गलियों में अब सोने की नहीं, सवालों की चमक है।
लोग खुलकर कह रहे हैं — “अगर ये ज्वेलरी शॉप इतनी साफ-सुथरी है, तो अपनी बहीखातों को सार्वजनिक क्यों नहीं करती?”
आज हालात ऐसे हैं कि गहनों से ज्यादा भरोसे की कीमत गिर चुकी है।
चमकते बोर्ड, जगमगती दुकानें और भीतर छिपी कालाबाजारी — यही है हिरणपुर के श्री बालाजी ज्वेलर्स की असली कहानी।
अब जनता सिर्फ गहनों की नहीं, जवाब की मांग कर रही है।
जिला प्रशासन, कर विभाग और पुलिस से लोग अपील कर रहे हैं —
> “जांच कीजिए, कार्रवाई कीजिए, और साबित कीजिए कि कानून की चमक अभी बाकी है।”









