पटना। एदारा-ए-शरिया, पटना-सह झारखंड शाखा की ओर से मरकज़ी अध्यक्ष एवं पूर्व राज्यसभा सांसद गुलाम रसूल बलियावी ने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर झारखंड में कादरी अरबी-फारसी विश्वविद्यालय की स्थापना तथा आलिम और फाजिल की डिग्रियों को मान्यता प्रदान करने की मांग की है।
पत्र में कहा गया है कि झारखंड राज्य में मदरसों से शिक्षा प्राप्त करने वाले हजारों छात्र-छात्राएं इस समय गहरी चिंता में हैं, क्योंकि राज्य सरकार ने आलिम और फाजिल की डिग्रियों की मान्यता समाप्त कर दी है। इस निर्णय से न केवल विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित हुआ है, बल्कि इससे उर्दू भाषा और मदरसा शिक्षा व्यवस्था के प्रति सरकार की उदासीनता भी उजागर होती है।

बलियावी ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि बिहार सरकार ने मौलाना मज़हरुल हक़ अरबी-फारसी विश्वविद्यालय, पटना की स्थापना कर एक सराहनीय उदाहरण प्रस्तुत किया है, जहाँ आलिम की डिग्री को स्नातक और फाजिल की डिग्री को स्नातकोत्तर के समकक्ष मान्यता दी गई है। इसके परिणामस्वरूप बिहार के मदरसा छात्र अब NEET, JEE, BPSC जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में भाग लेकर सरकारी नौकरियों में सफलता प्राप्त कर रहे हैं।
राज्य सरकार द्वारा शीघ्र सकारात्मक निर्णय लें, अन्यथा होगा आंदोलन: बलियावी
उन्होंने कहा कि यदि झारखंड में भी इसी तर्ज पर कादरी अरबी-फारसी विश्वविद्यालय की स्थापना की जाए और आलिम-फाजिल डिग्रियों को मान्यता प्रदान की जाए, तो मदरसा शिक्षित विद्यार्थियों को समान अवसर प्राप्त होंगे और शिक्षा में वास्तविक समानता स्थापित होगी। गुलाम रसूल बलियावी ने चेतावनी दी कि यदि इस विषय पर राज्य सरकार द्वारा शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो एदारा-ए-शरिया राज्यभर में पंचायत स्तर पर आंदोलन शुरू करने को बाध्य होगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी।









