पाकुड़ का स्वास्थ्य तंत्र चरमराया, CS की लापरवाही से हाहाकार – DC साहब बने जनता की आखिरी उम्मीद
पाकुड़। झारखंड के पाकुड़ जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था इस कदर बीमार है कि मरीज इलाज की उम्मीद लेकर अस्पताल तो पहुँचते हैं, लेकिन वहाँ से सिर्फ निराशा मिलती है। सदर अस्पताल में डॉक्टरों की भारी कमी, दवाइयों की किल्लत और जर्जर एम्बुलेंस की वजह से लोग मजबूर होकर प्राइवेट क्लिनिक का रुख करते हैं। लेकिन वहाँ भी फर्जी डॉक्टर और अवैध नर्सिंग होम उन्हें दोनों हाथों से लूट रहे हैं।
CS की लापरवाही बनी जड़ समस्या
यह कोई आज की समस्या नहीं है। सालों से पाकुड़ के लोग सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली झेल रहे हैं। और सबसे बड़ा सवाल यही है—इसका जिम्मेदार कौन?
स्थानीय लोग साफ कहते हैं कि मुख्य सचिव (CS) की लापरवाही ही इस बर्बादी की असली वजह है।
अगर अस्पतालों में डॉक्टरों की बहाली नहीं हो रही,
अगर एम्बुलेंस महीनों से कबाड़ बनकर खड़ी है,
अगर दवा आपूर्ति समय पर नहीं हो रही,
तो इसका दोष सीधे जिला प्रशासन पर नहीं, बल्कि रांची में बैठे CS पर है, जिनकी नज़र सिर्फ कागज़ी फाइलों तक सिमटी हुई है।
अवैध क्लिनिकों पर चुप्पी क्यों?
शहर के बीचोंबीच चल रहे दर्जनों अवैध नर्सिंग होमों पर भी CS की चुप्पी सवालों के घेरे में है।
बस स्टैंड पाकुड़,पुलिस लाइन के पास, तलवाडांगा के निकट यदि जगहों में
इन जगहों पर बिना डिग्री वाले लोग खुद को “विशेषज्ञ” बताकर मासूम मरीजों का शोषण कर रहे हैं। अगर जिला स्तर पर कार्रवाई की जाती भी है, तो ऊपर से दबाव आ जाता है और मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है। यह स्थिति साफ बताती है कि CS की चुप्पी ने फर्जी क्लिनिकों को खुला लाइसेंस दे दिया है।
इन सबके बीच पाकुड़ DC मनीष कुमार जनता की उम्मीद बने हुए हैं।
रात्रि चौपाल और गाँवों में जाकर आम जनता से संवाद किया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि “DC साहब ईमानदारी से काम कर रहे हैं, वे हमारे बीच आते हैं, हमारी बातें सुनते हैं, लेकिन उनकी मेहनत तब तक अधूरी है जब तक रांची से सहयोग नहीं मिलेगा।”
जनता का गुस्सा और सवाल
लोग अब सीधा सवाल CS से पूछ रहे हैं—
“जब पाकुड़ हर साल पत्थर खनन से करोड़ों की रॉयल्टी देता है, तो बदले में यहाँ के अस्पतालों में डॉक्टर और दवा क्यों नहीं पहुँचती?”
“क्या गरीब और आदिवासी की ज़िंदगी की कोई कीमत नहीं?”
“DC अकेले कितनी कोशिश करेंगे? CS अपनी जिम्मेदारी कब निभाएँगे?”
नतीजा
पाकुड़ आज उस मोड़ पर खड़ा है जहाँ जनता की उम्मीदें सिर्फ अपने DC साहब से जुड़ी हैं। लेकिन सिस्टम के शीर्ष पर बैठे CS की लापरवाही ने इस जिले की हालत बद से बदतर बना दी है।
जनता का कहना है—“अगर CS अपनी जिम्मेदारी नहीं निभा सकते, तो कुर्सी छोड़ दें। पाकुड़ के लोग अब और मरने-मराने को तैयार नहीं।”









